Raksha Bandhan Manane Ka Tarika 2020

Raksha Bandhan Manane Ka Tarika 2020

raksha bandhan manane ka tarika

हम यहां पर जानेंगे Raksha Bandhan Manane Ka Tarika 2020 भारत में रक्षाबंधन भाई बहनों का एक बड़ा त्यौहार धूमधाम से मनाया जाता है।



भारतीय संस्कृति का एक ऐसा रत्न है rakshabandhan जिसकी महीन किरणों में रिश्ते झिलमिलाते रहते हैं इस त्यौहार में धागों के जरिए प्यार की दौलत भाई की कलाई पर बांधा जाता है।


भारतीय संस्कृति में रक्षाबंधन का त्यौहार rakhi muhurat मे बहने अपने भाई के कलाई पर राखी बांधती है एवं भाई की उन्नति और लंबी उम्र की कामना करती है।


वही भाई भी बहनों की रक्षा सुरक्षा एवं अच्छा स्वास्थ्य का कामना करते हैं यह त्यौहार हर साल सावन के पूर्णिमा के दिन मनाया जाता है।


वैसे तो rakshabandhan त्यौहार को भाई बहनों का पर्व माना जाता है लेकिन अलग-अलग स्थान पर अपनी अपनी परंपराओं के अनुसार अलग-अलग तरह से मनाया जाता है।


Raksha Bandhan पर्व का संबंध रक्षा सूत्र से है यानी जो हमारा रक्षा सुरक्षा करने वाला है उसको हम रक्षा सूत्र बांधते हैं। महाभारत में भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर से रक्षाबंधन त्यौहार अपनी सेना के साथ मनाने का सलाह दिए थे।


भगवान श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर से कहा था कि तुम अपनी सेना के साथ में रक्षाबंधन का त्यौहार मनाओ जिससे तुम्हारी सेना की सुरक्षा होगी। उन्होंने रक्षाबंधन त्यौहार में अद्भुत शक्ति होने की बात भी कही थी।


Raksha Bandhan Manane Ka Tarika


सावन के पूर्णिमा यानी rakhi muhurat रक्षाबंधन के त्यौहार में भाई बहन सुबह स्नान करने के बाद भगवान की पूजा करते हैं पूजा करने के बाद रोली, कुमकुम, अक्षत एवं दीप जलाकर एक थाली में सजाते हैं।


फिर थाली में रंग बिरंगी राखिया रखी जाती है एवं उनकी पूजा की जाती है फिर बहन भाई के माथे पर रोली कुमकुम एवं अक्षत से टीका लगाने के बाद भाइ के दाहिने कलाई पर रेशम का बना हुआ राखी बांधती है।


राखी बांधने के बाद बहने भाई को मिठाई खिलाती है एवं भाई को लंबी उम्र तथा उन्नति की कामना करती हैं। भाइ बहन से राखी बंधवाने के बाद बहन को रक्षा सुरक्षा का संकल्प लेता है एवं उपहार देता है।


Raksha Bandhan के दिन बहनो से राखी बंधवाने से भाई को हर काम में विजय की प्राप्ति होती है एवं अन्य बाधाओं से भी मुक्ति मिलती है।


जिन भाइयों को बहने नहीं होती है वो मुंहबोली बहन से राखी बंधवाते हैं इन दिनों सोने चांदी के राखी का प्रचलन बढ़ने लगा है क्योंकि सोना एवं चांदी को शुद्ध धातु माना गया है। सोने चांदी की राखी में भी रेशम का ही धागा होता है।


कई जगहों पर पुरोहित अपने यजमान को राखी बांधते हैं एवं यजमान अपने पुरोहित को और ऐसे में दोनों एक दूसरे की उन्नति की कामना करते हैं।


भारत में कई जगहों पर rakhi muhurat में वृक्षों को भी राखी बांधने का विधान है क्योंकि प्रकृति जीवन का रक्षक होता है।


रक्षाबंधन की कथा


भविष्य पुराण के अनुसार देवासुर संग्राम में इंद्र की पत्नी देवराज इंद्र को असुरों पर विजय पाने के लिए रक्षा सूत्र बांधी थी एवं इसी रक्षा सूत्र की शक्ति से देवराज इंद्र युद्ध में विजयी हुए थे।


महाभारत की एक कथा में भगवान श्री कृष्ण अपने सुदर्शन चक्र से जब शिशुपाल का वध किए थे तो उनकी उंगली में थोड़ा सा खरोच आ गया था।


उनके उंगली में खरोच देखकर द्रौपदी अपने आंचल का एक टुकड़ा फार के उनके उंगली में लपेट दिया था और श्री कृष्ण ने द्रौपदी को यह वचन दिए थे कि समय आने पर उनके आंचल का एक एक धागे का कर्ज़ उतारेंगे।


वो दिन rakhi muhurat सावन का पूर्णिमा था। समय बीता एवं द्रोपदी के चीरहरण के समय श्री कृष्ण ने द्रौपदी के रक्षा करके अपना वचन निभाया।


तो यहाँ पे हमने Raksha Bandhan Manane Ka Tarika जाना उम्मीद है ये जानकारी आपको पसंद आया होगा अगर अभी भी आपका कोई सवाल या सुझाव है तो निचे कमेंट जरूर करें happy rakshabandhan

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