Raksha Bandhan Story In Hindi रक्षा बंधन की कहानी हिंदी में

Raksha Bandhan Story In Hindi रक्षा बंधन की कहानी हिंदी में

raksha bandhan story in hindi
raksha bandhan story in hindi


रक्षाबंधन के त्यौहार को राखी का त्यौहार भी कहा जाता है, यहाँ पर हम Raksha Bandhan Story In Hindi यानि रक्षा बंधन की कहानी हिंदी में विस्तार से जानेंगे। ये त्यौहार श्रावणी उत्सव के नाम से जाना जाता है एवं इसका जिक्र हमारे धर्म ग्रंथों में भी किया गया है।

Raksha Bandhan Story In Hindi


रक्षाबंधन के त्यौहार में बहनों के द्वारा भाई के हाथ में राखी बांधने की परंपरा वैदिक काल से चली आ रही है, पहले गुरु शिष्य की परंपरा चलती थी और इस परंपरा में शिष्य अपने गुरुओ को रक्षाबंधन या रक्षा सूत्र बांधते थे।

इस त्यौहार की शुरुआत कहां से हुई राखी बांधने की परंपरा कब शुरू हुआ इसके ऊपर रोचक कथाएं लिखी गई है।

रक्षा बंधन में पति पत्नी की कहानी।

raksha bandhan story in hindi
raksha bandhan story in hindi


भविष्य पुराण के अनुसार सतयुग में एक असुर हुआ करता था जिसका नाम था वृत्तासुर। इस असुर ने अपने साहस और पराक्रम के द्वारा देवताओं को पराजित कर दिया एवं स्वर्ग पर अपना अधिकार बना लिया।

किसी भी अस्त्र-शस्त्र से पराजित ना होने का वरदान मिला था वृत्तासुर को जिसके वजह से देवराज इंद्र हर बार उससे हार जाया करते थे, उसी समय महर्षि दधीचि अपने शरीर का परित्याग किए ताकि उनके शरीर के हड्डियों से शस्त्र बनाया जा सके वृत्रासुर को मारने के लिए।

फिर इंद्र अपने गुरु बृहस्पति के पास गए और उन्होंने उनसे बताया कि वो वृत्तासुर से युद्ध के लिए जा रहे हैं, उन्होंने कहा कि अगर युद्ध में उनकी विजय होती है तो ठीक है नहीं तो वीरगति को प्राप्त हो जाएंगे।

ये सारी बातें देवराज इंद्र की पत्नी देवी शती सुन रही थी तो उन्होंने अपने तपोबल के द्वारा एक रक्षा सूत्र बनाया और फिर देवराज इंद्र के कलाई पर बांध दिया, और वो दिन श्रावण का पूर्णिमा था।

देवराज इंद्र इस युद्ध में विजयी हुए और उन्होंने यह वरदान दिया कि इस दिन जो भी इस रक्षा सूत्र को किसी के कलाई पर बांधेगा वो व्यक्ति जिस भी क्षेत्र में जाएगा वहां पर विजयी होगा।

ये परंपरा आगे बढ़ा एवं देवी लक्ष्मी और राजा बलि ने भी इसे दोहराया और फिर ये त्यौहार भाई बहन का त्यौहार बन गया।

पुरोहित द्वारा रक्षाबंधन बांधने का परंपरा


यह त्यौहार वैदिक काल से लेकर अभी तक पुरोहितों के द्वारा यजमान को रक्षा सूत्र बांधने की परंपरा चली आ रही है। पहले के समय में पुरोहित राजा को एवं अन्य वरिष्ठ जनों को रक्षा सूत्र बांधा करते थे श्रावण के पूर्णिमा के दिन।

और फिर राजा एवं वरिष्ठ जन धर्म, यज्ञ तथा पूरोहितो की रक्षा का प्राण लेते थे।

द्रौपदी एवं श्री कृष्ण का रक्षाबंधन


महाभारत कथा के अनुसार इंद्रप्रस्थ में राजसु यज्ञ के दौरान श्री कृष्ण ने शिशुपाल का वध करने के लिए सुदर्शन चक्र चलाया जिसके वजह से श्री कृष्ण के उंगली में थोड़ा खरोच आ गया।

इस दौरान द्रौपदी ये सब देख रही थी उन्होंने श्री कृष्ण के उंगली से निकलता हुआ लहू को देखकर अपने आंचल का एक टुकड़ा फार के श्री कृष्ण के उंगली में बांध दिया।

ये घटना वाला दिन भी श्रावण का पूर्णिमा ही था इसके साथ ही श्री कृष्ण ने द्रौपदी को ये वचन दिया था कि समय आने पर उनके आंचल का टुकड़े का एक-एक धागा का मूल्य चुकाएंगे।

आगे चलकर पांडव और कौरवों के बीच द्वित हुआ जिसमें पांडवों की हार हुई और फिर द्रोपदी का चीर हरण मे श्री कृष्ण ने अपना दिया हुआ वचन को बखूबी निभाया।

Raksha Bandhan Story In Hindi


तो यहाँ पे हमने जाना Raksha Bandhan Story In Hindi या फिर रक्षा बंधन की कहानी हिंदी में उम्मीद है ये कहानी आपको काफी पसंद आई होगी इस पोस्ट से सम्बंधित आपके पास कोई सवाल या सुझाव है तो निचे कमेंट जरूर करे।

Post a comment