रक्षाबंधन कब शुरू हुआ - जानिए विस्तार से

रक्षाबंधन कब शुरू हुआ - जानिए विस्तार से

raksha bandhan kab shuru hua
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रक्षाबंधन कब शुरू हुआ यह तो किसी को भी नहीं पता लेकिन इस त्यौहार का भविष्य पुराण में वर्णन मिलता है की देवताओं एवं दानवो में जब घमासान युद्ध चालू हुआ तो दानव देवताओं के ऊपर हावी होने लगे।



रक्षा बंधन इतिहास


युद्ध में दानवो का देवताओं के ऊपर हावी होते देख भगवान इंद्र घबरा गए एवं बृहस्पति के पास गए और युद्ध का हाल बृहस्पति को बताने लगे।

वहीं पर बैठी इंद्र की पत्नी इंद्राणी सब बातें सुन रही थी। उन्होंने एक रेशम का धागा लिया एवं उस धागे को मंत्रों की शक्ति से पवित्र करने के बाद अपने पति इंद्र के हाथ पर बांधने दिया।

संयोग वस वो दिन सावन पूर्णिमा का था और ये माना जाता है कि इसी धागे की मंत्र शक्ति से इस लड़ाई में इंद्र विजय प्राप्त किए थे एवं उसी दिन से धागा बांधने की प्रथा रक्षाबंधन का त्यौहार चला आ रहा है। यह माना जाता है कि इस धागे में धन शक्ति हर्ष और विजय देने की शक्ति होती है।

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महाभारत की लड़ाई में श्री कृष्ण के उंगली में जख्म हो जाने पर द्रोपदी अपने सारी के एक टुकड़ा बांधी थी जिसके बदले में श्री कृष्ण ने इस उपकार के बदले में द्रोपदी का हर समय किसी भी संकट में उनका साथ देने का वचन दिये थे।

रक्षाबंधन का व्याख्या स्कंध पुराण पद्म पुराण एवं श्रीमद्भागवत के एक कथा जिसका नाम है वामनावतार मैं की गई है जो इस प्रकार है-

रक्षाबंधन के त्यौहार में राजा दानवेन्द्रो बलि की कहानी


राजा दानवेंद्रो बली ने जब अपना 100 यज्ञ पूरा करके स्वर्ग का राज्य पर अधिकार प्राप्त करने के लिए चल पड़ा। यह देख कर इंद्र एवं अन्य देवताओं ने भगवान विष्णु से सहायता के लिए गुहार लगाई।

तब भगवान वामन अवतार लिए एवं ब्राह्मण का वेश बनाकर राजा बलि के यहां भिक्षा मांगने गए, राजा बलि के गुरु इस बात को तुरंत भांप गए एवं राजा बलि को ये सुझाव दिए कि ब्राह्मण को भिक्षा ना दें।

लेकिन राजा बलि गुरु के बाद न मानते हुए ब्राह्मण रूपी भगवान वामन को मांगने के लिए बोला एवं भगवान वामन जो कि ब्राह्मण के वेश में थे राजा बलि से तीन पग भूमि मांगा।

एवं राजा बलि ने हंसते हुए ब्राह्मण को तीन पग भूमि लेने का वचन दे दिया। ब्राह्मण रूपी भगवान वामन तीन पग में ही सारा आकाश पाताल एवं धरती को माप लिया एवं राजा बलि को रसातल में भेज दिया।

तो इस तरह भगवान विष्णु ने राजा बलि के अभिमान को चकनाचूर किया और इस वजह से रक्षाबंधन का त्यौहार बलेव नाम से भी प्रख्यात है।

रसातल में राजा बलि दिन रात एक कर के तपस्या की है एवं अपने भक्ति के बल पर भगवान को 24 घंटा अपने सामने रहने के लिए मना लिए ।

भगवान के कई दिनों तक घर ना आने से लक्ष्मी जी परेशान हो गई उनको परेशान देख नारद जी उन्हें एक उपाय बताया, नारद जी के सुझाव पर लक्ष्मी जी राजा बलि के पास गई उनको राखी बांधना एवं अपना भाई बना लिया और फिर भगवान विष्णु को अपने साथ लेकर आई उस दिन भी श्रावण मास का पूर्णिमा था।

विष्णु पुराण के एक प्रसंग के अनुसार सावन के पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु, हयग्रीव रूप में अवतार लिए एवं वेद को ब्रह्मा जी के लिए एक बार फिर से प्राप्त किया। हैग्रीव विद्या एवं बुद्धि के प्रतीक है।

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भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में रक्षाबंधन पर्व की भूमिका


जन जागरण के लिए भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में रक्षाबंधन पर्व का सहारा लिया गया था। बंग भंग का विरोध करते हुए श्री रविंद्र नाथ ठाकुर ने बंगाल में भाईचारे एवं एकता के लिए इस त्यौहार का राजनीति उपयोग किए थे। ताकि जन समुदाय में एकता बनी रहे।

रविंद्र नाथ ठाकुर का एक प्रसिद्ध कविता "मातृभूमि वंदना" का 1905 में प्रकाशन हुआ।

लॉर्ड कर्जन ने सन् 1905 मे बंग भंग करने के बाद वंदे मातरम के आंदोलन से भड़की छोटा चिंगारी को शोला में बदल दिया था। 16 October 1905 को बंग भंग के घोषणा वाला दिन रक्षाबंधन का योजना साकार हुआ था।

तो यहाँ पे हमने रक्षाबंधन कब शुरू हुआ के बारे में जानकारिया ली अगर आपके मन में रक्षाबंधन से जुड़ी कोई सवाल या सुझाव है तो निचे कमेंट जरूर करिये, एवं रक्षाबंधन इमेज या शायरी के लिए अन्य पोस्ट देखें रक्षाबंधन की सुभकामनाये

1 Comments

  1. बहुत अच्छी जानकारी दी आपने आपको रक्षाबंधन की बहुत-बहुत शुभकामनाएं

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