History of Raksha Bandhan - हिन्दी में | राजपूतों की कहानी

History Of Raksha Bandhan - हिन्दी में | राजपूतों की कहानी

history of raksha bandhan
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यहां पे हम जानेंगे history of raksha Bandhan हिंदी में, यानी रक्षाबंधन के इतिहास मे राजपूतों, पांडवों, श्री कृष्ण एवम शिशुपाल वध से संबंधित और भी बहुत सारे कहानी जो रक्षाबंधन से जुड़ी है।


कहते हैं जब राजपूत लड़ाई पर जाया करते थे तब महिलाएं उनके माथे पर कुमकुम का तिलक लगाने के बाद हाथ में रेशमी धागा का राखी बांधा करती थी। एवं उनको विश्वास था कि ऐसा करने से ये धागा उनको लड़ाई में विजय श्री दिलाएगी एवं सुरक्षित वापस आएंगे।


एक प्रसंग के अनुसार सिकंदर की पत्नी एक हिंदू जो उनके शत्रु था उनको राखी बांध के अपना मुंहबोला भाई बनाई एवं युद्ध के समय उनके पति सिकंदर को न मारने का वचन लिया। लड़ाई शुरू होने पर पूरूवास ने युद्ध के समय अपनी बहन को दिए हुए वचन का सम्मान करते हुए सिकंदर को जीवनदान दिया।



History of Raksha Bandhan


महाभारत में भी रक्षाबंधन त्यौहार का उल्लेख है। जब युद्ध में जेस्ट पांडव युधिष्ठिर महाभारत का भीषण लड़ाई को देखते हुए श्री कृष्ण से पूछे भगवान मैं इस महायुद्ध के संकट को कैसे पार कर सकता हूं तो श्री कृष्ण उनको रक्षाबंधन त्यौहार मनाने का सलाह दिए थे।

श्री कृष्ण का ये कहना था कि रक्षाबंधन का रेशमी डोर में हर आपत्ति से मुक्ति पाने की शक्ति होती है। द्रोपदी द्वारा कृष्ण भगवान को राखी बांधने का एवं कुंती के द्वारा अभिमन्यु को राखी बांधने का बहुत सारे उल्लेख मिलते हैं।

एक और वृतांत के अनुसार श्री कृष्ण के द्वारा शिशुपाल का वध करते समय कृष्ण के उंगली में हल्की सी खरोच आ गई थी तो द्रोपदी ने अपनी सारी का टुकड़ा फार के उनके उंगली में बांधा था, और यह दिन श्रावण का ही पूर्णिमा का दिन था।

महाभारत में द्रोपदी के चीरहरण के समय श्रीकृष्ण ने द्रोपदी के द्वारा किए गए उपकार के बदले में सहायता किए थे। कहते हैं यहीं से एक दूसरे की परस्पर सहायता एवं सहयोग के लिए रक्षाबंधन का पर्व शुरू हुआ था।

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रक्षाबंधन के त्यौहार में साहित्यिक प्रसंग - History of Raksha Bandhan


history of raksha bandhan- कई सारे साहित्यिक ग्रंथ ऐसे हैं जिनमें रक्षाबंधन के पर्व का उल्लेख मिलता है। हरि कृष्ण प्रेमी का ऐतिहासिक नाटक इनमें बहुत ज्यादा महत्वपूर्ण है। ये ग्रंथ 1991 में 18 वां संस्करण प्रकाशित हुआ था।

रामराव सुभानराव बर्गे जी ने एक नाटक की रचना किए थे इन्होंने मराठी में शिंदे साम्राज्य के विषय में इस ग्रंथ को लिखे थे, एवं इसका शीर्षक राखी उर्फ रक्षाबंधन है।

रक्षाबंधन का त्यौहार 50 एवं 60 के दशक में हिंदी फिल्मों का लोकप्रिय विषय रहा था, राखी एवं रक्षाबंधन के नाम से कई सारे फिल्में बनी थी।

1949 एवं 1962 में दो फिल्में राखी नाम से बनी थी, एवं इस फिल्म को ए भीम सिंह ने बनाया तथा इसके कलाकार अशोक कुमार, वहीदा रहमान, प्रदीप कुमार और अमिता थे।

शीर्षक गीत के रूप में लिखा गया इस फिल्म का गीत "राखी धागों का त्यौहार" काफी लोकप्रिय रहा। एक और फिल्म 1972 में बनी जिसे एस एम सागर ने बनाया एवं इसका नाम था "राखी और हथकड़ी"।

इस फिल्म में आरडी बर्मन का संगीत था। सन 1976 में एक और फिल्म बनी जिसे राधा कांत शर्मा ने बनाई एवं इस फिल्म का नाम था "राखी और राइफल"। इस फिल्म मे दारा सिंह ने अभिनय किया था।

एक और फिल्म 1976 में बना जिसे शांतिलाल सोनी ने सचिन और सारिका के सहायता से बनाया एवं इसका नाम था "रक्षाबंधन"।

तो इस पोस्ट में हमने जाना history of raksha bandhan यानि रक्षाबंधन का इतिहास वैसे तो रक्षाबंधन का इतिहास बहुत लम्बा चौरा है लेकिन हमने यहाँ पे संछिप्त में कुछ घटनाओ के बारे में जाना

उम्मीद है history of raksha bandhan का ये भाग आपको पसंद आया होगा अगर फिर भी आपका कोई सवाल या सुझाव है तो निचे कमेंट जरूर करिये रक्षाबंधन की सुभकामनाये

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